Sunday, 3 May 2020

लॉकडाउन में जिंदगी

जिंदगी तो वैसे ही बहुत अकल्पनीय संभावनाओं का मिश्रण है। लेकिन ये लकडाउन हम सब के लिए एक अनोखा अनुभव है। हालाकि इसे देखने का नजरिया निश्चित करता है कि हम इसके हर पहलू को देख पा रहे है या नहीं। क्योंकि यह लकडॉउन सबके लिए समान नहीं है।
जहा पर यह अमीरों के लिए अपने पूरे परिवार के साथ समय बिताने का बड़ा ही अच्छा मौका है वहीं गरीबों के लिए जिंदगी से संघर्ष।

खैर छोड़िए इन सब बातों को हालांकि हम तो अपनी जिंदगी के बारे में बात करना चाह रहे थे कि हमारा लॉक डाउन कैसे बीत रहा है। हमारे लिए भी यह लॉक डाउन एक नया अनुभव से कम नहीं है। एक ओर इतनी लंबी छुट्टी अपने परिवार के साथ बिताने के लिए किसी उपहार से कम नहीं है लेकिन महामारी के इस दौर में हमें इसके दूसरे पहलू से भी जरूर अवगत रहना चाहिए जो कि हमारी सामाजिक जिम्मेवारी को परिभाषित करेगा।
हमने तो ये लॉकडाउन कृषि के कुछ कार्यों में अनुभव प्राप्त करके ब्यतीत किये। खेती के नजारे को देखने के  बाद हालाकि सबका मन हरे भरे खेतों में घूमने के लिए या फोटो खीचने के लिए आवश्य करता है जो कि प्रकृति के अनोखे उपहारों में से एक है। लेकिन इसके पीछे लगने वाले मेहनत और परेशानियों को नजदीक से अनुभव करने के लिए आपको जमीन से जुड़कर कुछ कार्य करने के बाद ही पता चलेगा। हालाकि मुझे भी इसमें ज्यादा अनुभव तो नहीं है लेकिन जो भी अनुभव मैंने प्राप्त किए वो मुझे काफी प्रेरणादायक और रोचक लगे।
बाहर की दृष्टि से देखकर आपको उनके कार्यों की बारे में अंदाज़ा लगाना मुश्किल होगा। देखकर तो लगता है की यह कोई मुश्किल कार्य नहीं है, मौसम को देखते हुए बीज बो दो और फसल पक जाने के अनाज आपके घर पहुंच जाएगा।लेकिन इसका सही अंदाज़ा लगाने के लिए आपको या तो खुद ही महसूस करना होगा या फिर किसी के माध्यम से ही जाना जा सकता है।प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर चलने वाला ये एक अनोखा बिजनेस वैसे ही देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान करता है। अर्थव्यवस्था का यह प्राथमिक क्षेत्रक के अन्तर्गत आने वाला महत्वपूर्ण विषय है।
इसके अलावा भी हमने बहुत सारे अनुभव इस लॉकडॉउन में प्राप्त किए। इस लाकडाउन ने हमें ये तो जरूर ही सीखा दिया कि जिंदगी जीने के लिए जरूरतें बहुत कम है, बाकी के दिखावे की जिंदगी में ही हमसब परेशान रहते है। लाकडाउन में हमने तो कुछ शारीरिक मेहनत का पाठ सीखा और साथ में काफी प्रेरणादायक और साहित्यिक किताबे पढ़ी।
बाकी आगे भी समय बाकी है कुछ ना कुछ तो होता ही रहेगा।
अंत में भारत सरकार के द्वारा लिए गए निर्णयों का सम्मान करते हुए इस महामारी के समय में जो भी हमारी जिंदगी को सरल बनाने में सहयोग कर रहे है उनका आभार व्यक्त करता हूं।आशा है कि हम इस महामारी से जल्द निजात पा लेंगे।जिंदगी में सारी चीजे सामान्य हो जाएगी। तब तक के लिए हम सब को सहयोग करना पड़ेगा। यह काम सामूहिक प्रयास के जरिए ही किया जा सकता है।और कहना चाहूंगा आप भी लोकडाउन के समय का यथासंभव सदुपयोग करें।
धन्यवाद।

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