Thursday, 2 January 2020

नए_वर्ष_के_नाम_पर_दोहरी_मानसिकता


कल बहुत लोगों ने ये पोस्ट किया था कि ये नव वर्ष मुझे स्वीकार नहीं। मै ये जानना चाहता हूँ कि अगर इस व्यस्त दुनिया में कोई नए वर्ष के नाम पर खुशी मना लेते है तो क्या परेशानी है, दो बार नए वर्ष की खुशी मना लेने से खुशी कम तो नहीं हो जाएगी।दो बार मना लेंगे।गुड मॉर्निंग और गुड नाइट तो रोज विश करने में कोई परेशानी नहीं है तो फिर नए वर्ष की शुभकामनाएं दो बार क्यों नहीं दे सकते ।
आपके अंग्रेजी  नववर्ष के विरोधी होने से मुझे प्रतीत होता है की आपलोग अंग्रेजी सभ्यता और संस्कृति के विरोधी है जिसमें अंग्रेजी भाषा भी शामिल है।मै भी आपके साथ हूँ मगर विरोध केवल नए वर्ष के नाम पे ही नहीं हर क्षेत्र में अंग्रेजी के इस्तेमाल पर होना चाहिए। जैसे कि अंग्रेजी के त्योहारों पर छुट्टी ना ले, उस दिन काम करे और केवल हिन्दी का इस्तेमाल करे चाहे महीने का नाम ही क्यों ना हो। अंग्रेजी का इस्तेमाल ही बंद कर दे।
क्योंकि नए वर्ष के नाम पर हम अंग्रेजो की गुलामी नहीं करते बल्कि खुद की खुशी के लिए छुट्टी मनाते हैं, कुछ स्वादिष्ट खाना खा लेते है, कहीं घूम लेते हैं जो की केवल हम अपनी खुशी के लिए करते है और वो किसी भी मायने में गलत नहीं है। इस व्यस्त दुनिया में हम छुट्टी के नाम पे ही तो अपने दोस्तो और परिवार के सदस्यों के साथ समय व्यतीत कर पाते है।
अंग्रेजी छोड़कर अगर हम हर जगह हिन्दी का प्रयोग करने लगे तो इससे बेहतर हमारी भारतीय संस्कृति और सभ्यता के लिए कोई योगदान हो ही नहीं सकता।लेकिन हम अपने आप को आगे दिखाने के लिए तो अंग्रेजी बोलने, विदेशी चीजों का इस्तेमाल करने में तनिक भी नहीं हिचकिचाते है।
वैसे अगर हम अपनी भारतीय हिन्दी संस्कृति और सभ्यता के साथ किसी और भाषा को सीख रहे है तो उसमें कोई गलत बात नहीं है। ये हमारी जिज्ञासु प्रवृत्ति के होने के साथ- साथ वसुधैव कुटुंबकम् की नीति को प्रदर्शित करता है।