Friday, 9 October 2020

Jai Prakash university

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जयप्रकाश विश्वविद्यालय एक ही तो विश्वविद्यालय हमारे तीन जिला सारण सिवान और गोपालगंज को मिलाकर जो कि जिम्मेदार है हमारे यहां के समस्त छात्रों के उज्जवल भविष्य के लिए।

जयप्रकाश विश्वविद्यालय, नाम ही काफी है छात्रों के चेहरे से मुस्कान छीन लेने के लिए। शायद ही कोई और शिक्षण संस्थान या परीक्षा आयोजक होगा जो ऐसा न्याय छात्रों के साथ किया हो।

अभी एसएससी रेलवे के छात्रों द्वारा समय से परीक्षा का योजना कराना समय में परिणाम घोषित ना करने की आवाज बुलंद की गई थी लेकिन उस से भी बदतर स्थिति हमारे जयप्रकाश विश्वविद्यालय की व्यवस्था कि है। हम तो यह भूल ही चुके हैं कि कभी इस विश्वविद्यालय में तय समय पर परीक्षा का आयोजन करके परिणाम घोषित किया हो। इस यूनिवर्सिटी की स्थापना छात्रों के उच्च शिक्षा को आसान बनाने के लिए यहां किया गया था, लेकिन यहां से उच्च शिक्षा प्राप्त करना कितना मुश्किल हो गया है यह शायद केवल यहां के छात्र ही समझ पाएंगे।हम तो यह भूल ही चुके हैं कि कभी जयप्रकाश विश्वविद्यालय ने तय समय पर परीक्षा का आयोजन कर के परिणाम घोषित किया हो। हमारे यहां के ज्यादातर बच्चे तो जिला या राज्य को छोड़कर कहीं बाहर ही पढ़ाई करने के लिए चले जाते हैं लेकिन फिर भी जो किसी कारणवश यहां से बाहर नहीं जा पाते या मजबूरीवश यही प्रवेश लेना चाहते हैं उन्हें पहले ही कैलकुलेशन  लेते देखा जाता है कि 3 साल की डिग्री 5 या 6 साल  में तो मिल ही जाएगी। प्रवेश लेने के बाद कक्षा संचालन का कार्य गिने-चुने कॉलेजों में संपन्न हो पाता है।रिजल्ट के बारे में तो पूछिए मत पता नहीं किस हिसाब से कॉपी चेक कर लिया जाता है समझ में नहीं आता किसी उपस्थित छात्र को अनुपस्थित मानकर परिणाम पेंडिंग में डाल दिया जाना और अनुपस्थित छात्र ‍‍‌को पास घोषित कर दिया जाना तो यहां के लिए आम बात है।

बाहर के जगह में तो यह से विख्यात है कि यहां के छात्र केवल नकल से ही पास कर पाते हैंलेकिन सच में मैं बताऊं तो यहां से नकल करके पास होना ही बाहर से पढ़ लिख के पास होने से भी ज्यादा मुश्किल है।

और तो और यहां पास होने के बाद भी कागजात लेने में भी पूरी परेशानी झेलनी पड़ती है। अगर आपके डॉक्यूमेंट में कोई गलती हो जाए तो आपको इतना परेशान कर दिया जाएगा कि शायद आपने कोई बहुत बड़ा क्राइम कर दिया हो हालांकि गलती छात्र की होती भी नहीं है या तो साइबर कैफे वाला गलती करता है या फिर विश्वविद्यालय कर्मचारी के द्वारा गलती किया जाता है लेकिन झेलना तो छात्रों को ही पड़ता है। हां मैं मानता हूं कि गलती होती है तो दंड भुगतना पड़ता है लेकिन किसी के नाम में एक अक्षर सुधारने के लिए विश्वविद्यालय के 10 बार चक्कर लगाना कहां तक का इंसाफ है।

यहां के छात्रों को डिग्री लेने के बाद कॉलेज और विश्वविद्यालय का अंतिम प्रणाम करते देखा जाता है कि चलो विश्वविद्यालय से पीछा तो छूटा।

लेकिन क्यों? इसके पीछे जिम्मेदार कौन है? इसके लिए आवाज क्यों नहीं उठाया जाता? इस विश्वविद्यालय के छात्र चुप क्यों हैं?

इसका जवाब आपको पूर्ण रूप से कभी नहीं मिल पाएगा। सब एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करके बचने की कोशिश करते मिल जाएंगे। कोई जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ही नहीं सकता। विश्वविद्यालय पर दबाव बनाने के लिए छात्र संघ का निर्माण किया गया था जो छात्रों के हित की बातें विश्वविद्यालय कर्मचारी और अधिकारी तक पहुंचा सके लेकिन इसका इस्तेमाल आज तक अपनी राजनीति चमकाने के अलावा किसी छात्र हित कार्य में अभी तक देखने को नहीं मिला है। इस विश्वविद्यालय में भी काफी सारे छात्र संघ एक्टिव है लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिखाई देता।

तो क्या हम मान के चले कि इसमें सुधार की गुंजाइश नहीं है।इस विश्वविद्यालय को बेहतर तरीके से संचालित नहीं किया जा सकता और पैसे में प्रतिक्रिया नहीं दी जा सकती!

ऐसा नहीं है, बिल्कुल हो सकता है लेकिन इसके लिए सबको अपनी-अपनी जिम्मेवारी है समझने भी होगी और उसे निभाना भी होगा। हमारे देश में सैकड़ों विश्वविद्यालय कार्यरत है जो समय पर परीक्षा लेकर डिग्रियां प्रदान करते हैं।

सबसे बड़ी बात तो यही ने वर्सिटी हमारे लिए प्रतिष्ठा का सवाल है जब जब कभी हमारे यहां के छात्रों के द्वारा बाहर कहीं बताया जाता है कि बिना किसी वजह से स्नातक कंप्लीट करने में उन्हें 3 साल की जगह 5 या 6 साल लगते हैं तो लोगों की आनायास ही हंसी छूट जाती है। ऐसा तो कई बार छात्रों के साथ नौकरी के साक्षात्कार में भी होता है और बड़ी परेशानी कई बार छात्रों की उम्र निकल जाती है इसके इंतजार में। छात्रों को डिग्री मिलने से पहले ही नौकरी की अधिकतम आयु सीमा खत्म हो जाती है।

इस परेशानी को शायद वह लोग कभी नहीं समझ पाएंगे जो इस व्यवस्था के लिए जिम्मेदार हैं।

आशा करता हूं कि इस लेख को पढ़ने के बाद शायद आप सब इस व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कोई सुझाव विश्वविद्यालय को दे सके और जो समर्थ है कदम उठाने में वो इस व्यवस्था में थोडा बहुत सुधार कर सके।

इससे उन समस्त छात्र जिनका नुकसान हो गया उनके भरपाई तो नहीं हो पाएगी लेकिन भविष्य में आकर छात्रों को उत्तर शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा और जो छात्र यहां से पढ़ाई करें उन्हें ऐसा नुकसान और परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

धन्यवाद

Prince Shukla