वैसे तो बिहार का इतिहास बड़ा रोचक है, और आज बिहार ने अपना 109 साल का सफर पूरा कर लिया। आज ही के दिन 1912 ई. में इसकी स्थापना की गई थी बंगाल से विभाजित करके। भौगोलिक स्थिति तो कुछ खास नहीं है, पहाड़ों के नाम पे कुछ एकाध पहाड़िया कुछ बॉर्डर वाले इलाके में मिल जाते है। नदिया तो पर्याप्त है लेकिन उनका ठिकाना इस तरह से है कि कुछ जगह पूरी तरह बाढ़ग्रस्त है तो कुछ पूरा सूखाग्रस्त।नदियों के पर्याप्त होने के कारण तराई क्षेत्र भी है, जिसकी वजह से खाने लायक अनाज भी उपज ही जाता है, लेकिन हमारे यहां के किसानों की स्तिथि बहुत बढ़िया नहीं ही कहीं जा सकती। इसका सबसे सबसे बड़ा उदाहरण है कि कोई भी किसान अपनी आने वाली पीढ़ी को इस कृषि से दूर रखने कि ही कोशिश करते है, जिस कृषि को अर्थव्यस्था कि रीढ़ मानी जाती है। जिस कृषि का योगदान हमारे जीडीपी में 1950 के दशक में 50 फीसदी हुआ करता था अब वो 17 फीसद से भी कम रह गया है।
चलिए ये सारी चीजे तो प्राकृतिक है, लेकिन यहां के रहने वाले पुराने शासकों ने अपने कार्यों के बदौलत दुनिया में हमारी पहचान तो बना दी। चन्द्रगुप्त मौर्य और शेरशाह सुरी को कौन नहीं जानता होगा।राजा पोरस और चाणक्य जैसे महान गुरु जिसके समय में विश्व विजेता सिकंदर भी भारत जीते बगैर लौटने को मजबूर हो गया था वैसे और भी काफी सारे महान व्यक्तियों की जन्मभूमि और कर्मभूमि रह चुका है हमारा बिहार। उस समय में पाटलिपुत्र यानि पटना हमारे देश के केंद्र की तरह हुआ करता था जहा से राजा शासन करता था। यहां तक कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान तक यहां के राजा चन्द्रगुप्त मौर्य के समय में शासन होता था, जो कश्मीर में आज़ादी के बाद से ही संघर्ष खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था, वहा भी श्रीनगर की स्थापना अशोक ने ही कि थी, जो कि अभी तक जम्मू कश्मीर की राजधानी हुआ करती थी।
लेकिन ये सारी चीजे पुरानी हो गई।हम अभी आगे है तो केवल और केवल जनसंख्या के मामलों में, जो कि कहीं ना कहीं से हमारे यहां अशिक्षा और गरीबी का कारण भी है। अशिक्षा और गरीबी तो एक दूसरे के पूरक ही है जहां अशिक्षा वहा गरीबी और जहा गरीबी वहा अशिक्षा।
रोजगार के मामलों में तो हम इतने फिसड्डी है कि पूछिए ही मत। लेकिन हा मेहनत करने से हम पीछे नहीं हटते, भले ही कहीं जाकर बाहर के राज्यों में करना पड़े। हमारे राज्य मे पर्याप्त रोजगार ना होने के कारण या तो हमे पूरी तरह सरकारी नौकरियों पर निर्भर रहना पड़ता है या फिर किसी दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए दर - दर कि ठोकरें खानी पड़ती है। दूसरे राज्य के लोग को लगता है कि हम उनके हको को छीन कर उसपर भी हक़ जताते जा रहे है। इस बात की लेकर कई नेताओं ने यहां तक कह दिया था कि इन बिहारियो को वापस बिहार भेज दिया जाए। अब बहुत से लोग बिहारी शब्द को गाली की तरह इस्तेमाल करने लगे है, अब हमारी अलग ही पहचान बन चुकी है या तो हमें बहुत मेहनती समझा जाता है, या फिर अव्वल दर्जे का पढ़ाकू। बाहर के लोगो को लगता है कि पढ़ा लिखा होगा तो आईएएस ही होगा अगर नहीं तो मजदूर या रिक्शा चलाने वाला। और तो और गुंडई कर मामले में भी पीछे नहीं है और कहीं ना कहीं बॉलीवुड भी इसकी ऐसी छवि बनाने के लिए जिम्मेवार है।
लेकिन यहां के लोगो के लिए बिहारी शब्द ही गर्व के लिए काफी है। यह हमारे अंदर इस कदर घर कर गया है कि हम अपने यहां के इतिहास का बखान करते नहीं थकते और बताना चाहते है कि हम सब से श्रेष्ठ थे।लेकिन इन सब के बीच हम अपना वर्तमान को इग्नोर करते रहते है, जो कि हम अच्छी तरह जानते है कि इतिहास स हमें सीख लेकर वर्तमान को सही ढंग से जीते हुए सुनहरे भविष्य का चिंतन करना चाहिए।
लेकिन हम इस चीज को स्वीकार ही नहीं करना चाहते कि हम कितना पीछे हो चुके है, शायद इन सब के पीछे इन राजनयिकों या राजनेताओं का हाथ है, जो कि हमारे यहां विकास के नाम पे केवल लोगो को बेवकूफ बनाते है। ये भी कुछ हद तक ठीक है, लेकिन समस्या के जड़ में जा कर देखिएगा तो पता चलेगा कि कहीं ना कहीं यहां के नागरिक यानि कि हमलोग भी जिम्मेदार है जो कि जाति के नाम पे वोट करके आशा कर लेते है कि वो हमारा विकास करेगा।
हालांकि बदलाव इतनी जल्दी नहीं आता लेकिन कभी ना कभी जरूर आता है, हमें भी आशा है कि यहां बदलाव जरूर आएगा। और सबसे पहले हमें अपने आप में बदलाव लाकर शुरुआत करनी होगी।
हम समस्त युवाओं से अपील करना चाहेंगे कि आप भी जिस तरह से कर सके, बिहार को एक नया पहचान दिलाने के लिए योगदान करें ताकि हम अपना खोया हुआ गौरव फिर से प्राप्त कर सके।और हमे अपनी पहचान बताने के लिए इतिहास का बखान करना ना पड़े। आखिर कब तक बीते हुए इतिहास को ढोते रहोगे, कुछ तो ऐसा करो कि आगे आने वाली पीढ़ी आपके कारनामे को इतिहास के रूप में पढ़े। क्योंकि इतिहास को ढोते रहने से हमारी पहचान नहीं बदलेगी बल्कि इसके लिए हमें कर्म करके साबित करना होगा। क्युकी लोग सुनी हुई बातों पर कम और देखी हुई चीजों पे ज्यादा यकीन करते हैं।
अंत में आप सभी को बिहार दिवस कि हार्दिक शुभकामनाएं।
जय हिन्द। जय बिहार।।।




